शरद पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है - शरद पूर्णिमा की पौराणिक कथा
सनातन धर्म में अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का विशेष और अत्यंत पवित्र महत्व है। इस तिथि को शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) , रास पूर्णिमा , कोजागरी पूर्णिमा (Kojagari Purnima) तथा अमृत पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह रात्रि वर्ष की सबसे सुंदर और ऊर्जावान रात्रियों में से एक मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, संपूर्ण वर्ष में केवल इसी दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं (16 Kalas) से परिपूर्ण होकर पृथ्वी पर अपनी अमृतमयी किरणों की वर्षा करता है। इस पावन तिथि पर जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु, धन-वैभव की देवी माता महालक्ष्मी और चंद्रदेव का पूजन करने का विधान है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात्रि में देवी लक्ष्मी स्वर्ग लोक से पृथ्वी पर भ्रमण करने आती हैं और यह देखती हैं कि कौन सा भक्त रात्रि में जागरण कर उनका भजन-कीर्तन कर रहा है। इसी कारण इस पर्व को 'कोजागरी' (को जागर्ति - यानी कौन जाग रहा है) भी कहा जाता है। आइए, इस विस्तृत आलेख में जानते हैं कि शरद पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है, इसकी...